टीम उर्दू भाषा

उर्दूभाषा.कॉम उर्दू शायरी की वेबसाइट है जिसका मक़सद उर्दू शायरी को ऐसे लोगों तक आन लाइन उपलब्ध कराना है जो इससे गहरा लगाव रखते है और इसका आनन्द लेना चाहते हैं | वेबसाइट पर इस समय लगभग उर्दू शायरों की ग़ज़लें , नज़्में उपलब्ध हैं जिनमें बढ़ोतरी जारी है। इस वेबसाइट का सबसे विशिष्ट पहलू ये है कि इसमें उर्दू शायरी को देवनागरी और रोमन लिपियों में भी पेश किया गया है ताकि उर्दू लिपि न जानने वाले उर्दू शायरी के प्रेमी भी अपने पसंदीदा शायरों का कलाम पढ़ सकें।

ऐसे पाठकों की आसानी के लिए सरल और लोकप्रिय शायरी को अलग से जमा किया है जिसमें सारे बड़े शायरों का आसान कलाम शामिल है। उर्दू लिपि न जानने वालों के लिए, ग़ज़लों और नज़्मों के हर शब्द का अर्थ भी इस वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उर्दूभाषा.कॉम’ वेबसाइट को अधिक से अधिक फैलाने के लिए, अब नई टेक्नालोजी का इस्तेमाल करके डेस्कटॉप और लैपटॉप कंपुयटरों के साथ साथ टैबलेट  और मोबाइल फ़ोन पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

मातृभाषा परिवार:

 

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सह-संस्थापक : अर्पण जैन ‘अविचल’
अर्पण जैन एक ऐसे उद्यमी और निवेशक हैं, जिन्हें कई कंपनियों को शुरू करने और सफलतापूर्वक उनका संचालन करने का श्रेय हासिल है।अर्पण जैन मध्यभारत की सफलतम आई टी कंपनी सेंस टेक्नॉलजीस के संस्थापक हैं। यह कार्पोरेशन मध्यभारत में वेबसाइट, मोबाइल एप, पोर्टल बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। इसके अलावा अर्पण ने खबरहलचल.कॉम, केएनआईइंडिया.कॉम, इन्डियनरिपोर्टरस.कॉम, उर्दूभाषा.कॉम जैसी तमाम कंपनियों की आधारशिला रखी।राजीव गाँधी विश्वविद्धयालय के अंतर्गत एसएटीएम कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस में बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही अर्पण जैन ने सॉफ्टवेयर व वेबसाईट का निर्माण शुरू कर दिया था। उन्होंने फॉरेन ट्रेड में एमबीए किया,तथा पत्रकारिता के शौक के चलते एम.जे. की  पढाई भी  की है | समाचारों की दुनिया ही उनकी असली दुनिया थी, जिसके लिए उन्होंने सॉफ्टवेयर के व्यापार के साथ ही खबर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की और इसे भारत की सबसे तेज वेब चेनल कंपनियों में से एक बना दिया। साथ ही ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनोतियाँ’ पर ही अर्पण ने अपना शोध कार्य किया है अर्पण ने देश के कुछ दिग्गज संपादकों के साथ भी लंबे वक़्त तक चलने वाली, कामयाब साझेदारी की।अर्पण जैन सोशल मीडिया और ऐप्स पर काफी सक्रिय रहते हैं और इन प्लेटफॉर्म्स पर तैरती खबरों के साथ-साथ विचारों पर भी अपनी पैनी निगाह रखते हैं। भारत के हर राज्यों में अर्पण की टीम है और इसमें पत्रकार के साथ-साथ, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्धार्थी आदि शामिल हैं |अर्पण जैन ‘अविचल’ खबर हलचल न्यूज के संपादक है और पत्रकार होने के साथ साथ , शायर और स्तंभकार भी हैं| अविचल ने अपने कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा हैं और आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता के आधार आंचलिक पत्रकारिता को ज़्यादा लिखा हैं | मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बड़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया |अब जबकि ऑडियंस धीरे-धीरे टीवी से हटकर डिजिटल मीडिया की तरफ रुख कर रही है, अर्पण ने भी डिजिटल मीडिया में कुछ बड़ा करने की ठानी है। अर्पण ने ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ नाम से एक किताब भी लिखी है। वह फिलहाल अपनी दूसरी किताब पर काम कर रहे हैं, जो भारत में ‘वेब पत्रकारिता कैसे करना है’ इस के बारे में होगी। भारत का पहला पत्रकारों के लिए बनाया गया सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपेडीया www.IndianReporters.com” भी अर्पण जैन के  द्वारा ही संचालित किया जा रहा है|
भ्रमण भाष : +91-9893877455
अणुडाक :arpan455@gmail.com
अंतरताना : www.arpanjain.com
सह-संस्थापक : डॉ. प्रीति सुराना
डॉ. प्रीति समकित सुराना वारासिवनी, जिला बालाघाट (मप्र) एक छोटे से कस्बे में रहती हैं, बीकॉम, एम. ए. हिंदी साहित्य के साथ एक्यूप्रेशर की DAT किया है। मातृभाषा के विषय पर शोध जारी है। ‘अंतरा- शब्दशक्ति” की संस्थापक और संपादक होने के साथ साथ लेखिका भी है गद्य और नई कविता के साथ विभिन्न विधाओं पर भी लेखन सतत जारी है। “मेरा मन” ब्लॉग एवं फेसबुक पेज की लेखिका जिनके अब तक 2 काव्य संग्रह, 1 कर्म इकतीसा , और 1 पारिवारिक परिचय पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है, 1 गद्य संग्रह और 1 काव्य संग्रह प्रकाशाधीन हैं। अब तक 16 साझा संग्रह का हिस्सा रही हैं, आगामी 12 साझा संग्रह प्रकाशाधीन है । 4 साझा संग्रह संपादित किये हैं। और आने वाले 5 संग्रहों में विशिष्ट संपादक की भूमिका में हैं, 7 साझा संग्रह सम्पदान में प्रकाशाधीन हैं।
एक मासिक पत्रिका ‘हिंदी सागर’ जेएमडी प्रकाशन की प्रधान संपादक होने के साथ वेब मासिक पत्रिका अंतरा-शब्दशक्ति का भी संपादन कर रही हैं। पिछले एक वर्ष से प्रिंट मीडिया में दैनिक लोकजंग, भोपाल से प्रकाशित अखबार में बतौर साहित्य सम्पादक कार्य कर रही हैं। साथ ही www.antrashabdshakti वेबसाइट पर सतत सक्रिय हैं।
हिंदी सेवा हेतु प्रकाशन एवं प्रिंट मैगज़ीन शुरू करने के लिए प्रयासरत हैं।
छोटे से शहर से बड़ी सोच के साथ लगातार देश भर में कई साहित्यिक कार्यों में सक्रिय होकर अनेक सम्मान प्राप्त किये हैं।
लेखन को स्वान्तः सुखाय स्वयं के लिए संजीवनी, और आगामी जीवन का पाथेय मानती हैं। हिंदी सेवा के साथ गौसेवा एवं विविध संस्थाओं में पदासीन होकर कार्य कर रही हैं|
भ्रमण भाष: +91-9009465259
9424765259
अणुडाक : pritisamkit@gmail.com
अंतरताना : www.pritisamkit.com